गोरखपुर के प्रतिष्ठित समाजसेवी, वरिष्ठ व्यवसायी और श्रीराम मंदिर आंदोलन के समर्पित कार्यकर्ता बालकृष्ण सर्राफ के निधन से शहर में शोक की लहर दौड़ गई। 98 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक जगत के लिए उनका जाना एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
गोरखपुर के निवासी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व प्रांत अध्यक्ष रहे बालकृष्ण सर्राफ ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा, धार्मिक कार्यों और व्यापारिक संगठनों को समर्पित किया। श्रीराम मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही और शहर के सामाजिक जीवन में उनका विशेष योगदान रहा। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की।
रविवार को राप्ती तट स्थित राजघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गाय। उनके परिवार में पुत्र अतुल सर्राफ, अनुप सर्राफ तथा पौत्र वैभव, सौमित्र और शांतनु सर्राफ सहित अन्य परिजन हैं। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया
बालकृष्ण सर्राफ केवल एक सफल व्यवसायी ही नहीं, बल्कि समाज सेवा, धार्मिक चेतना और संगठनात्मक नेतृत्व का भी एक मजबूत स्तंभ थे। उनके निधन से गोरखपुर ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।