गोरखपुर: संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से शारदा संगीतालय द्वारा आयोजित 10 दिवसीय पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत कार्यशाला का शुभारंभ एस.एस. एकेडमी, गोरखपुर में दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. सुधा मोदी ने कहा कि भोजपुरी लोकगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान और लोकजीवन की आत्मा हैं। इनमें हमारी परंपराएं, संस्कार और सामाजिक जीवन की अमूल्य विरासत समाहित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में लोकगीतों का संरक्षण बेहद जरूरी है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम लोकगीत ही हैं।
विशिष्ट अतिथि कनक हरि अग्रवाल ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं।
कार्यशाला के प्रशिक्षक एवं लोक कला साधक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि 21 जुलाई तक चलने वाली इस कार्यशाला में कजरी, सोहर, विवाह गीत, झूमर, चैता और निर्गुण सहित विभिन्न पारंपरिक लोकगीतों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पहले दिन करीब 30 प्रतिभागियों ने सावनी झूमर "कहवाँ से आवे रामा कारी रे बदरिया..." का अभ्यास किया। लोकधुनों और सामूहिक गायन से पूरा वातावरण लोक संस्कृति के रंग में रंग